Sunday, April 10, 2011

यादें

                            



               

 
आपका

कड़ाके की सर्दियों में

खिलती धूप सा खड़े होना,

कुछ सर्द रातें,

आग की गर्म लपटें

और आपका

दूर होकर भी पास होना,

याद है आज भी हमें।

हमारी नादानियों पर

आपका मुस्कुराना,

तमाम रात साथ बैठ

खामोश निगाहों का

आपस में गुफतगू करना,

बहती नदी का किनारा

लहरों का तट से

टकराकर लौट जाना,

पहाड़ों की शीतल वादियों में,

कुछ दूर साथ चलना,

निशब्द फिज़ाएं, और

मधुर गीत गुनगुनाना,

एक लम्बा सफ़र

और

आपकी गोद में

सिर रखकर सोना,

याद है आज भी हमें,

कभी आपको करीब पाकर

फिर से खो देना........

26 comments:

  1. Thanks for Ur comments Dr.Divya.

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  2. कविता अच्छी लिख गयी है। कहीं-कहीं टंकण की त्रुटियाँ रह गयी हैं। उन्हें सुधार देना अच्छा रहेगा। साधुवाद।

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  3. Thank u every one for all your valuable and inspirational comments.

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  4. @Acharya ji: Aap ke sujhaav par gaur karenge aur jald hi kuch badlaaw ke saath iss post ko update karenge.. dhanyawad :)

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  5. अच्छे है आपके विचार, ओरो के ब्लॉग को follow करके या कमेन्ट देकर उनका होसला बढाए ....

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  6. कुछेक टंकण अशुद्धियों को छोड़ दें तो इस कविता में प्रयुक्त ताज़ा बिम्बों-प्रतीकों-संकेतों से युक्त आपकी भाषा अभिव्यक्ति का माध्यम भर नहीं, जीवन की तहों में झांकने वाली आंख है।
    इस कविता का काव्य-शिल्प हमें सहज ही कवयित्री की भाव-भूमि के साथ जोड़ लेता है।
    बहुत अच्छा प्रयास, प्रतिमा, आशीष।

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  7. @Manoj Uncle: Thank u so much for ur inspirational comment uncle. :)

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  8. आपकी गोद में सर रख कर सोना,
    याद है आज भी हमें,
    कभी आपको करीब पाकर
    फिर खोना........

    यह खोने की प्रक्रिया ही न जाने क्या क्या कवित्त रचा देती है .सुन्दर भावाभिव्यक्ति




    धुप - धूप
    गुफतगु - गुफ्तगू
    उन् - उन

    बाकी मुझे नहीं लगता कि कोई और अशुद्धि हो टंकण में ...

    शुभकामनायें



    एक आग्रह ...

    कृपया टिप्पणी बॉक्स से वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें ...टिप्पणीकर्ता को सरलता होगी ...

    वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिए
    डैशबोर्ड > सेटिंग्स > कमेंट्स > वर्ड वेरिफिकेशन को नो करें ..सेव करें ..बस हो गया .

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  9. आपकी कविता में विचार की प्रौढ़ता है.. सुन्दर कविता है.. और जिसे आचार्य परशुराम जी और मनोज जी का आशीर्वाद मिल जाये उसे और क्या चाहिए..

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  10. @Sangeeta ji: In shabdon ki ashudhiyan saamne laane ke liye aabhar.unhe sahi karliya hai.. :)

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  11. @Arun CHandra: Thank u so much for the comments. And i do agree with you, my father Acharya Parashuram Ji has always been an inspiration for my write ups. :)

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  12. कविता में बहुत सुन्दर भाव संजोए हैं। अरुण जी के शब्दों में कहूँ तो - बिलकुल परिपक्व। लेकिन यदि टंकण त्रुटियों को छोड़ दें तो भी इसे इसी शब्दावली में काव्य की भाषा और शिल्प की कसौटी पर कसने की आवश्यकता है। तभी यह रचना कुंदन बन सकेगी। निसंदेह आप प्रतिभा से सम्पन्न हैं। यह आपकी रचना से प्रदर्शित है। इसे अन्यथा न लेने के आग्रह के साथ तथा शुभकामनाओं सहित,

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  13. @All: टंकण की त्रुटियों को सुधार इस कविता को पुनः पोस्ट किया है. इन त्रुटियों को सुधरने के लिए मैं हरीश गुप्ता जी और आचार्य परशुराम जी की आभारी हूँ.Thank u every one for all your valuable comments. :)

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  14. शुक्रिया, सुझाव आत्मसात करने के लिए।

    अब तो बस यह कहना है - वाह!

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  15. बहुत ही सुंदर अहसासों को शब्द दिया है...लाजवाब...मन खुश हो गया।

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  16. याद है आज भी हमें,
    कभी आपको करीब पाकर
    फिर से खो देना........

    सब कुछ याद करवा दिया आपकी इन पंक्तियों ने ...आपका आभार

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  17. प्रतिमा जी !!
    अभिव्यक्ति टंकण की भूल के बाद भी प्रभावित करती हैं... आपने प्रेम के भाव को इतनी कोमलता से छुआ है कि प्रकृति भी मुखर हो उठी है.. बधाई की पात्र हैं आप!!

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  18. मानव ह्रदय की कोमल भावनाओं का सुकोमल शब्दचित्र है यह कविता.. पाठक को लगता है जैसे उसके ही मन की बात कह दी गयी हो..

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  19. आपकी गोद में
    याद है आज भी हमें,

    कभी आपको करीब पाकर

    फिर से खो देना........
    soft sweet and subtle expression ....!!
    beautiful poem .

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  20. बहुत अच्छी पोस्ट, शुभकामना, मैं सभी धर्मो को सम्मान देता हूँ, जिस तरह मुसलमान अपने धर्म के प्रति समर्पित है, उसी तरह हिन्दू भी समर्पित है. यदि समाज में प्रेम,आपसी सौहार्द और समरसता लानी है तो सभी के भावनाओ का सम्मान करना होगा.
    यहाँ भी आये. और अपने विचार अवश्य व्यक्त करें ताकि धार्मिक विवादों पर अंकुश लगाया जा सके., हो सके तो फालोवर बनकर हमारा हौसला भी बढ़ाएं.
    मुस्लिम ब्लोगर यह बताएं क्या यह पोस्ट हिन्दुओ के भावनाओ पर कुठाराघात नहीं करती.

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  21. आभार आपका इस सुँदर और दिल के करीब लगने वाली कविता के लिए . मिलन और विछोह की इस व्यथा को को सुँदर शब्दों में पिरो दिया है .

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  22. @ALL: thanks a ton every one for such inspirational comments and all your valuable suggestions.I will keep all of them in mind from my next post.

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